मैं हूं मानसी

19 03 2007

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मैं हूं मानसी भाटिया। मेरी आठवीं की परीक्षाएं समाप्त हुई हैं। बीस दिन की छुट्टियां मिली हैं। एग्जाम्स के दिन बहुत तनाव से बीते हैं। अब मैंने भी अपना ब्लॉग बनाया है। यह समझिये कि वर्डप्रैस पर एक बीज बोया है। इन छुट्टियों में इस बीज की देखभाल की जायेगी। आगे फिर गर्मियों की छुट्टियां भी आयेंगी। मेरे स्कूल में तो किसी बच्चे को शायद ही पता हो कि ब्लॉग क्या होता है। मैं उन सब को अपने ब्लॉग के बारे में बताऊंगी तो उनमें से कई शायद बहुत हैरान होंगे।


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33 responses

19 03 2007
जीतू

अरे वाह! शाबास। चलो अब पापा के साथ तुम भी ब्लॉगिंग करने लगी हो।
हिन्दी ब्लॉगिंग मे तुम्हारा स्वागत है।

अभी हिन्दी ब्लॉगिंग मे बच्चों और नव-युवाओं के लिए कोई ब्लॉग नही था, अब तुम आ ही गयी हो तो लगातार लिखना। और हाँ पढाई से समय मिले तब ही। पहले पढाई।

भावी चिट्ठाकारी जीवन के लिए बहुत बहुत बधाई।

20 03 2007
masijeevi

अरे मानसी स्‍वागत है आपका इंतजार था।
आपको इनसे और
इनसे लिने में मजा आएगा।

20 03 2007
masijeevi

लिने के स्‍थान पर मिलने पढ़ें

20 03 2007
ali

hey hi its very nice to see a hindi blog of such a sweet little girl keep it up take care

20 03 2007
समीर लाल

शाबश, यहाँ छुट्टियाँ खूब अच्छी कटेंगी. अब जब भी पापा लिखें तब आप भी लिखना. हम सबको पढ़ने में बहुत मजा आयेगा. :)

20 03 2007
Shrish

बहुत खूब उत्कर्ष का सबसे छोटा चिट्ठाकार होने का रिकॉर्ड तोड़ दिया तुमने। अब छुट्टियों में पापा से अच्छी तरह ब्लॉगिंग सीख लो।

उम्मीद है चिट्ठाजगत में नियमित उपस्थिति दर्ज कराओगी। मेरी शुभकामनाएं !

20 03 2007
Shrish

उत्कर्ष संजय भैया का बेटा है, फिलहाल यहाँ तुम्हारे बराबर का वही दोस्त मिलेगा।

20 03 2007
संजीत त्रिपाठी

स्वागत और शुभकामनाएं मानसी, चिट्ठे का नाम तो बड़ा बढ़िया रखा है आपने।
जल्दी जल्दी लिखो और हमें पढ़ाओ

20 03 2007
सृजन शिल्पी

अरे वाह, मानसी! बहुत अच्छा लगा तुम्हारा चिट्ठा देखकर। कई दिनों से इंतजार था तुम्हारा लिखा पढ़ने का। बस, छुट्टियों का जमकर फायदा उठाओ और अपनी पसंद की कविताएँ और कुछ चित्र आदि बनाकर पोस्ट करो। यह भी बताना कि कैसा लग रहा है चिट्ठाकारी की दुनिया में आकर।

20 03 2007
उन्मुक्त

अरे, बहुत खूब। मजा आया।

20 03 2007
अनूप शुक्ला

अरे वाह, बहुत अच्छे, शाबास! खूब लिखो। पापा की तरह पापुलर हो जाओ।

20 03 2007
प्रत्यक्षा

तुम्हारे ब्लॉग का नाम बहुत अच्छा लगा । खूब लिखो, खूब पढो ।

20 03 2007
आशीष श्रीवास्तव

मानसी,

बहुत अच्छे :)
उम्मीद है कि तुम्हारा यह बीज एक बहुत बड़ा वृक्ष बनेगा ।

20 03 2007
रवि

मानसी, बहुत-2 शुभकामनाएँ कि पापुलेरिटी में अपने पापा से भी आगे निकल जाओ. आपके पापा को भी अच्छा लगेगा.

20 03 2007
प्रियंकर

ब्लॉग की दुनिया में मानसी का बहुत-बहुत स्वागत है .

20 03 2007
अतुल शर्मा

बहुत खूब! ब्लॉग का नाम भी सुंदर है। जल्दी ही बेटी गुड़ और पापा शकर हो जाएँगे।

20 03 2007
manisha

मानसी तुम्हारा चिठ्टाकारी की दुनिया में स्वागत है।

मनीषा

hindibaat.blogspot.com

20 03 2007
SHUAIB

हर दिन अपने बोये बीज पर पानी डालती रहना – स्वागत है तुमहारा हिन्दी चिट्ठा जगत मे

20 03 2007
संजय बेंगाणी

शाबास मानसी. आपका चिट्ठा देख कर बहुत प्रसन्नता हो रही है. उत्कर्ष को तुम्हारा चिट्ठा दिखाऊँगा तो उसे प्रेरणा मिलेगी, आलसी हो गया है, लिखने में :)

मेरी शुभकामनाएं. छुट्टीयों का खुब सद-उपयोग करना :)

बाय.

20 03 2007
manya

Hi Maanasi… it was really nice to read ur blog.. keep writing will wait for watever u write Poems, jokes or watever u feel like telling.. aur Haan school ki baatein jaroor bataana.. aur aap holidays mein ky akar rahi hain .. tell me.. bbye c u..

20 03 2007
Amit

बहुत अच्छे मानसी। ब्लॉग जगत में और हिन्दी ब्लॉग जगत में तुम्हारा स्वागत है। :)

20 03 2007
अभय तिवारी

ये सब लोग बूढ़े हो गये हैं मानसी.. तुम्हारी बात सिर्फ़ मैं समझ सकता हूँ.. दो तीन दिन पहले हे मैं चौदह साल का हुआ हूँ.. मुझे जो समझ में आता है लिखता हूँ.. तुम भी बस अपन मन की ही लिखना.. किसी से पूछना वूछना मत.. पढ़ना ज़रूर.. जब लिखने बैठो तो पढ़ने की ज़रूरत समझ आती है.. बाय!

20 03 2007
सागर चन्द नाहर

वाह अभय जी
आप चौदह के हो पर मैं दो तीन दिन बाद आठ का होने वाला हूँ :)

शाबास मानसी
बहुत खूब, उम्मीद है इन बीस दिनों की छुट्टियों में कम से कम बीस लेख पढ़ने को मिलेंगे।

20 03 2007
pankaj Bengani

वाह. बहुत बढिया.

स्वागत है मानसी. अब इतने धूम धडाके का स्वागत समारोह करवा कर गायब मत हो जाना. :)

लिखती रहना. छुट्टीयों मे भी उसके बाद भी.

21 03 2007
मानसी आंटी

खूब लिखो और बहुत अच्छा लिखो। तुम्हारे इस पोस्ट में तुम्हारी हिन्दी की वर्तनी बिल्कुल सही है और इस तरह हिन्दी में टाइप करने की प्रैक्टीस हो जायेगी तो स्कूल के प्रोजेक्ट आदि भी कम्प्यूटर पर बना पाओगी।

शाबाश।

–मानसी आंटी

21 03 2007
Tarun

बहुत अच्छे मानसी। ब्लॉग जगत में और हिन्दी ब्लॉग जगत में तुम्हारा स्वागत है। :)

22 03 2007
मानसी भाटिया

आप सभी का बहुत ध्नयवाद।

24 03 2007
फुरसतिया » पत्रकार ब्लागिंग काहे न करें, जम के करें!

[...] बिटिया मानोसी जब कुल जमा सात लाइन की लिखती है तब भी उसके ब्लाग पर लोग तमाम कमेंट [...]

24 03 2007
अविनाश

वाह मानसी, आपका ब्‍लॉग अच्‍छा लगा। आपकी बोली-बानी भी मीठी है। ब्‍लॉग का नाम भी आपने सोच कर रखा है, अच्‍छा लगता है सुन कर। लेकिन एक सवाल करूं ? कच्‍ची धूप क्‍यों नाम दिया? गर्मी की छुट्टियों में इतनी धूप भी चुभने लगती है दोस्‍त।

15 05 2007
Rohit

Are wah mansi bahut acha

21 05 2007
PRAMENDRA PRATAP SINGH

बड़ा अच्‍छा लगता है बडे होने का एहसास, कम कम अब मै भी किसी को आदेश दे सकूँगा :)
अभी तक कुछ दिनों पहले तक शायद मै ही सबसे छोटा था किन्‍तु अब नये नये भाई बहन आ रहे है सभी को हार्दिक सुभकामनाऐं।

नियमित लिखिऐगा, अपने भइया को भूल न जाना

10 10 2007
Anonymous

‘kkck’k fcfV;k ne ls fy[kuk cksys rks lcdks ekew cuk Mky

26 05 2008
girish billore

ati sundar
swagatm

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